Tag: Hindi poetry

कुछ बातें!

बिखरी हुई यादों को समेटता आज भी मेरा मन क्यूँ उस छाया को छूना चाहता है जो समय की गहराईयों में कहीं खो गयी थी रह रह कर मेरा दिल वापस लौटना चाहता था क्यूंकि अतीत के पन्नों पर कुछ बातें अनकही सी थी! उन ख्यालों के भंवर में कुछ बातें अनसुनी सी थी कुछ … Continue reading कुछ बातें!

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कैसा था वह…

कैसा था वह पेड़ जिस पर मधुमास में भी पत्ते नहीं, कैसा था वह दिन जिसमें कहीं उजाला नहीं, कैसी थी वह रात जिसमें एक तारा नहीं, कैसा था वह जीवन जिसमें रस की कोई आस नहीं।

एक ढ़ेर रेत का

फूल समझ कर मैंने छुआ था जिस काँटे को, वह काँटा नहीं विष था मेरी ज़िदगी का। उधेड़ कर देखा जब मैंने अपने जीवन की सीवन को, रसधार नहीं वह तो था एक ढ़ेर रेत का।